mere college ki ladki………
मेरे कॉलेज की एक लड़की
ख़ूबसूरत नाजुक शर्मिली
जिसके आते ही मच जाती
कॉलेज के लड़को में खलबली
उस लड़की को हुआ न था
अब तक किसी लड़के से प्यार
बन ठन कर आते लड़के
रहते उसके लिए हरदम तैयार
मै भी एक लड़का था उन लड़को की कतार में
ख्वाइश थी खोने की उस लड़की के प्यार में
नए-नए उपाय तलाशे
तरह तरह के फेंके पाशे
पर एक भी गेंद विकेट पर ना आयी
दिल मुरादे दिल के अन्दर ही
लेती रह गयी जम्हाई
कि एक दिन अचानक
वो मेरी कालोनी में आयी
उसे देख खामोश दिल ने आवाज लगाई
उठ जाग दीवाने भोर भई
जो कहना है कह दे मौका है सही
हिम्मत कर कह दिया
पर चुका हूँ तेरे प्यार में
तुम ही हो सबसे खुबसूरत
कॉलेज के हजार में
सुनकर वह फूल गयी
मैंने सोचा प्यार के झूले झूल गयी
फुला गुस्सा फ़ोर दिया आकर मेरे परिवार में
मुफ्त में मिले चाट जो मिलते नही बाजार में
इस घटना ने मेरी मुरादों को दिल के अन्दर ही सुला दिया
धीरे धीरे मैंने उस लड़की को भुला दिया
आज बहुत दिनों बाद
उस लड़की की यादो ने
दिमाग की घंटी बजाई है
मेरे कोलेज में फ़िर एक हसीं लड़की आयी है
उसे देख दिल का ढोल
अपने आप बज जाता है
प्यार का एक नया संसार
ख्वाबो में सज जाता है
पर जब भी वो चाट याद आती है
दिल के स्टूडियो में चल रहे
फिल्मी ख्वाब का
क्लाइमेक्स ही बदल जाता है
bhai jakkas hai yar ye ladkiyon ke piche nahi bhagne ka bhagane ka
good very good
u r incredible nitesh. really a good poem dat is. i 2 luv poems