pardes me hu
परदेस में हू पर यादे तुम्हारी
अब भी मेरे दिल में है ,
तुम पास नही पर बातें तुम्हारी
मेरी हर महफिल में है.कुछ खास अभी दिन बीते नही
जब साथ तेरे हम भी थे यही,
हाथो में था हाथ , नजरो में नजर
दिल भी थे मिले ,सब कुछ था सही.
ये याद नही क्या मन में थी उलझन
हल्की ही मगर कसक थी कही.
फ़िर एक दिन अचानक सब कुछ खो गया
बस मै रह गया और तुम न रही.जीवन से लड़ो ये तुमने कहा था
बस यही सोच के जिंदा हूँ ,
बिन तेरे इस दुनिया में
मै बिन पर एक परिंदा हूँ .
मै हूँ जी रहा तुम साथ नही
ये कहते हुए शर्मिंदा हूँ,
जो तुम ही नही, स्वदेश में भी
परदेस का एक बाशिंदा हूँ .खामोश हो तुम पर गूंज तुम्हारी
अब भी मेरे दिल में है .
तुम साथ नही पर बातें तुम्हारी
मेरी हर महफिल में है……………………
************************** -नीतेश मानव
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wid whomever u r in luv, she is so lucky……………………………………………..