India of my dream

मेरे सपनो का भारत कैसा हो
हां वो उंचा हिमालय के जैसा हो.
जिसके होने से धरती का सीना ताने,
मुस्कुरा दे आसमा भी कुछ ऐसा हो.

सर-सब्ज हो इसकी पावन जमी
कुदरत की कोख में ये संवारता रहे,
प्रकृति घायल न हो इसके प्रांगन में कभी
सुलगती रेत पे भी बादल बरसता रहे.

कोई ऊंचा न हो कोई नीचा न हो
इसके आँचल की खुशबू हरेक को मिले,
जाति- धर्मो के बंधन से बेहद परे
इसके साये  में बस प्यार ही प्यार पले.

देश की सत्ता जनता के हाथो में हो
गणतंत्र की मिठास फिजा में फ़ैली रहे,
मिट जाए जौरो-सितम का नामोनिशा
हर मुसीबत  की ऊंची दीवारे ढहे.

यहाँ बचपन हो रौशन  शिक्षा के दीये में
नौजवा जीवनभर आत्मनिर्भर रहे,
बढ़ते कदमों के आगे कोई बंदिश ना हो
हर तरफ़ ज्ञान की पवित्र गंगा बहे.

इसके आँगन में रोज फुल खिलते रहे
गांधी सुभाष यूं  ही इससे  मिलते रहे ,
मलाल हो ना यहाँ पे किसी से किसी को,
जख्म जो भी हो  मिलकर सिलते रहे.

विज्ञान का भविष्य इसका  वर्तमान हो
आविष्कारों के जनक इसके संतान हो,
क्षमताओं का क्षेत्र इतना व्यापक बने
ये दुनिया के  देशो का भगवान हो.

इतना होकर भी ये सबका साथी रहे
मानव-मूल्यों की रक्षा यहाँ लक्ष्य हो,
इसकी आभा से रौशन हो सारा जहाँ 
आगे बढ़ने का मौका सबके समक्ष  हो.

बात सपने की हो तो हकीकत कही
सो जाती है चुपचाप चादर में छिपकर
मेरे सपने हकीकत के आँखों की है
इसको  होना  है पुरा किसी हाल पर……

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                                                                             - नीतेश मानव

Comments
  1. elite says:

    May Lord fullfill ur dream…..
    I also wish every1 shd pray for this…..
    As god may deny one’s wish but not all’s….

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