savere suraj ki aankho se..
सवेरे सूरज की आँखों से आँखे मिलाकर,
रात चाँद की चाँदनी के घेरे में छत पर ,
गोद में माँ के अपने सर को छुपाकर,
हां! मैंने एक सपना देखा है.
जागती हुई आँखों से खुशियों
होते हुए अपना देखा है.
बात सपने की हो तो हकीकत कही
सो जाती है चुपचाप चादर में छिपकर ,
मेरे सपने हकीकत के आँखों की है
इसको होना है पुरा किसी हाल पर ,
जब हो सपनो की सौगात पाने का जज्बा
तो ऐसे हालात में ,
मेहनत का पनपना देखा है .
हां मैंने एक सपना देखा है .
दिन है यू तो परिश्रम के बेशक बड़े ,
है ख्वाईशो के तारे भी कम तो नही,
करके हिम्मत है बढ़ना सही राहों पर
लड़खरा जो गए वो कदम तो नही,
जिनके कदमो पे पड़ती हो मंजिल की छाया
ऐसे दीपक का सूरज सा चमकाना देखा है,
हां मैंने भी एक सपना देखा है.
इन सपनो को हकीकत में लाने के बाद,
इनकी खुशबू को दिल में बसाने के बाद,
असंख्य आँखों को सपना दिखाने का सपना,
भटकते रास्तो को मंजिल पे लाने का सपना,
जागती हुई आँखों से सपनो को
दुनिया की आँखों के आगे सच दिखाने का सपना.
……..
हां ! मैंने हकीकत को सपनो में देखा है.
******************************
- नीतेश मानव
ITS FINE BUT NOT SO GOOD….WHAT DO U THINK…????